हिंदू · नाम जप राधा नाम कितनी बार जपना चाहिए? कोई एक संख्या सबके लिए सही नहीं होती। सबसे ज़रूरी है नियमित और भाव से जपना। कई भक्त थोड़े से शुरू करके धीरे-धीरे बढ़ाते हैं।
शुरू करने का सरल तरीका
रोज़ एक ही समय पर 108 की एक माला से शुरू करें। एक-दो हफ़्ते बाद शाम को दूसरी बैठक जोड़ें। जैसे-जैसे सहज हो, 4, 11 या 16 माला तक बढ़ाएँ।
रोज़ की माला रोज़ का नाम जप 1 108 4 432 11 1,188 16 1,728
गिनती से परे
अपने सत्संगों में प्रेमानंद महाराज अक्सर कहते हैं कि राधा नाम केवल गिनती वाली बैठक में नहीं, पूरे दिन चलता रहे। गिनती आदत बनाने का सहारा है।
सभी परंपराएँ · माला माला में 108 मनके क्यों होते हैं? 108 कई भारतीय परंपराओं में पवित्र संख्या है, और हर परंपरा इसे अपने ढंग से समझाती है।
हिंदू एक पारंपरिक व्याख्या है 27 नक्षत्र गुणा उनके 4 पद: 27 × 4 = 108।
जैन नवकारवाली के 108 मनके पंच परमेष्ठी के 108 गुणों के प्रतीक हैं: अरिहंत 12, सिद्ध 8, आचार्य 36, उपाध्याय 25 और साधु 27।
सिख सिमरना में अक्सर 27 या 108 गाँठें होती हैं। 27 के चार फेरे 108 बनते हैं। गुरबाणी गिनती से ज़्यादा सच्चे स्मरण पर ज़ोर देती है।
सुमेरु मनका ज़्यादातर मालाओं में एक बड़ा मनका होता है, मेरु या सुमेरु। इसे पार नहीं किया जाता। फेरा पूरा होने पर माला पलटकर फिर शुरू करते हैं। 27 या 54 मनकों की छोटी मालाएँ भी आम हैं, यानी 108 का चौथाई और आधा।
हिंदू · संकल्प 1.25 लाख जप का संकल्प कैसे लें संकल्प तय समय में तय संख्या में जप पूरा करने का व्रत है। पारंपरिक पुरश्चरण एक मंत्र के 1,25,000 जप हैं।
चरण
मंत्र चुनें। अगर आपके गुरु हैं, तो पूछें कि कौन सा मंत्र और गिनती आपके लिए ठीक है।दिनों की संख्या चुनें। 40 दिन आम हैं: 1,25,000 ÷ 40 = रोज़ 3,125, लगभग 29 माला।संकल्प लें। पहले दिन अपना उद्देश्य, मंत्र, गिनती और दिन बोलें।समय और स्थान एक रखें। रोज़ एक ही आसन और समय इसे आसान बनाता है।हर दिन दर्ज करें। अगर कोई दिन छूट जाए, तो माला पर किया जप बाद में जोड़ें ताकि गिनती सही रहे।इसे पूरा करें। परंपरा से पुरश्चरण गिनती के दसवें भाग (दशांश) के हवन से पूरा होता है। पूरी विधि के लिए अपने गुरु या पुरोहित से पूछें।
विज्ञापन की जगह केवल भक्ति से जुड़े प्रायोजक · मुफ़्त प्लान में दिखते हैं मंत्र, चालीसा या गुरबाणी के पास कभी नहीं
हिंदू · गिनती उँगलियों पर गिनती (कर माला) कर माला का अर्थ है हाथ पर गिनना। अँगूठा उँगलियों के पोरों पर चलता है, हर जप पर एक पोर।
कई परंपराएँ गिनती में तर्जनी उँगली के प्रयोग से बचती हैं। परिवारों और गुरुओं में तरीके अलग होते हैं, इसलिए वही अपनाएँ जो आपको सिखाया गया। जब माला न हो, तो PrayerCount का पॉकेट लॉक आपको आँखें बंद करके गिनने देता है।
जैन · पर्युषण पर्युषण में नवकार जप पर्युषण जैन वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण समय है। श्वेतांबर जैन 8 दिन मनाते हैं, जो संवत्सरी पर पूरे होते हैं। दिगंबर जैन 10 दिन दसलक्षण पर्व मनाते हैं।
एक सरल योजना
रोज़ की नवकार गिनती चुनें, अक्सर 9 का गुणज: जैसे रोज़ 9 माला (972)। हो सके तो जप के साथ 48 मिनट की सामायिक करें। अपने संघ के सामूहिक जप में जुड़ें ताकि सबकी गिनती साथ जुड़े। प्रतिक्रमण और सभी जीवों को मिच्छामि दुक्कडम् के साथ समापन करें।
सिख · सिमरन वाहेगुरु सिमरन: रोज़ की गाइड सिमरन है वाहेगुरु को याद करना। यह कहीं भी किया जा सकता है, सिमरना के साथ या बिना।
अमृत वेला
भोर से पहले के समय उठें, स्नान करें, और किसी शांत जगह बैठें। अपनी नितनेम बाणियाँ पढ़ें। वाहेगुरु सिमरन के लिए बैठें। कई लोग स्वास गिरास करते हैं: साँस लेते समय "वाहे" और छोड़ते समय "गुरु"। अरदास के साथ समापन करें।
पूरे दिन काम और सफ़र के दौरान भी सिमरन चलता रहे। काउंटर या सिमरना आपको मन भटकने पर ध्यान दिला सकता है, लेकिन संख्या से ज़्यादा सच्चा स्मरण मायने रखता है।
ये गाइड आम परंपरा बताती हैं। परंपराएँ और परिवार अलग होते हैं, इसलिए अपने गुरु, संघ या गुरुद्वारे का पालन करें।