ध्वनि और प्रार्थनाध्वनि ने हमेशा प्रार्थना को आगे बढ़ाया है
संगीत सभागारों से बहुत पहले लोगों ने पाया कि सुर, लय और स्थिर साँस बेचैन मन को शांत कर सकते हैं। भारत में ध्वनि (वाक्, नाद) को पवित्र माना गया, और जप, गायन और श्रवण स्थिरता के मार्ग बने।
इसीलिए यहाँ की पृष्ठभूमि ध्वनियाँ सरल हैं: एक स्वर, एक घंटी, पानी, बारिश। कुछ ऐसा जिस पर टिका जाए, जिसके पीछे भागा न जाए।